श्री गणेशजी की आरती (Aarti of Shri Ganeshji in hindi)

मैं पंडित रमाशंकर तिवारी आज आपको यहां पर गणेश जी की आरती की महिमा के बारे में बताएंगे क्योंकि गणेश जी की पूजा हिंदू सनातन धर्म में सदियों से चलता आ रहा है कि कोई भी पूजा करने से पहले शुरुआत होने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है जिसका काफी ज्यादा अधिक महानतम भी होता है क्या आपको पता है कि आखिर में गणेश जी की पूजा या वंदना सबसे पहले किसी भी शुभ कार्य करने से पहले क्यों किया जाता है यहां पर इस सवाल का जवाब भी आपको मिल जाएगा साथ ही में श्री गणेश जी की आरती भी यहां पर प्रदान की गई है आरती करने की जो विधि होती है

प्रातः सुबह 4:00 बजे उठकर के नित्य क्रिया करके स्नान करने के बाद पूजा की थाली सजाकर आरती की जाती है अब इसके बाद हम आपको आरती बताएंगे

श्री गणेशजी की आरती (Aarti of Shri Ganeshji in hindi)

श्री गणेशजी की आरती (Aarti of Shri Ganeshji)

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी

माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी।

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा

लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

अन्धे को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ।।

‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

गणेश जी की पूजा सब देवताओं से पहले क्यों किया जाता है? (Why is Ganesha worshiped before all other gods?)

गणेश भगवान की पूजा सबसे प्रथम इसलिए किया जाता है की माता पार्वती एक बार स्नान करने लगी उन्होंने गणेश जी को पहरेदार बना रखा था गणेश भगवान पहरा दे रहे थे उसी समय भगवान शिव आ गए और वह अंदर प्रवेश करने के लिए आज्ञा मांगी भगवान गणेश ने उनको आज्ञा नहीं दिया अंदर जाने से मना कर दिया भगवान शिव इतने मैं क्रोधित हो गए और गणेश से युद्ध करने लगे दोनों मैं काफी युद्ध हुआ भगवान शिव असंतुलित होकर त्रिशूल से गणेश भगवान को मार गिराए और अंदर प्रवेश जब माता जी को सूचना मिली तो मां आकर के देखो भगवान शिव अंदर प्रवेश कर गए माता जी को सूचना मिली कि गणेश को भगवान शिव ने मार गिराया तब उनको देख कर उनको बहुत बड़ा दुख हुआ और रोने लगी रोने लगी कि सारे देवता घबरा गए

और आकर के माता से प्रार्थना करने लगे की माता हम लोग बहुत दुखी है जब माताजी को दुखी से देखा भगवान शिव ने तो उन्होंने जाकर के हाथी का मस्तक को काट लाए और भगवान गणेश के सिर में जोड़ दिए तब माता ने भगवान शिव से कहा कि हमारे पुत्र की पूजा सबसे पहले होनी चाहिए इतने में भगवान शिव प्रसन्न हो गए और सारे देवताओं के साथ प्रथम पूजा भगवान शिव ने किया और माता ने आशीर्वाद दिया कि जो हमारे पुत्र का सबसे पहले पूजा करेगा उसकी सारी मनोकामना पूरी होगी

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